Thursday, May 9, 2013

दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??


दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??

जो तुझसे हमेशा दूर था .. उसे अपना क्यूँ समझता है ..??

क्यूँ खुद ही ज़ख्म बना के .. उसे खुद ही कुरेदता है ..??
दिल तू बेवजह ही .. क्यूँ दुखता है ..??

जो तेरे लिये कभी था ही नहीं .. उसे खोने से क्यूँ डरता है ..??
क्यूँ सुलझी सी इस बात को .. सोच-सोच कर और उलझाता है ..??
दिल तू फिर इस तरह .. क्यूँ दुखता है ..??

जो बस ख्वाब थे तेरे .. उसे क्यूँ हकीक़त मान लेता है ..??
क्यूँ ख्वाबो की हसीं दुनिया छोड़ .. दर्द भरी ज़िन्दगी जीता है ..??
दिल तू जाने .. क्यूँ दुखता है ..??

जो जिंदगी का बस एक किस्सा है .. उसे क्यूँ जिंदगी का हिस्सा कहता है ..??
क्यूँ उन किस्सों को याद कर .. ज़िन्दगी में बस गम को सहता है ..??
दिल तू नादान तो नहीं .. जो यूँ दुखता है ..??

जो राह तेरी है ही नहीं .. उस पर की मंजिल को क्यूँ सोचता है ..??
क्यूँ नहीं तू किसी मोड़ पर मुड़के .. अपनी राह ही बदल देता है ..??
दिल तू ऐसे ही .. क्यूँ दुखता है ..??

जो कहता नहीं तुझे अपना .. क्यूँ उस पर ऐतबार कर बैठता है ..??
क्यूँ इस पत्थर दिल दुनिया में तू .. प्यार का ये सौदा ही करता है ..??
दिल तू सब जान कर  भी .. आखिर क्यूँ दुखता है ..??

दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??