Thursday, April 11, 2013



कुछ अपने से लगने लगे थे ...


कुछ अपने से लगने लगे थे ...
कुछ तुम से जुड़ने लगे थे ...
कुछ करीब से होने लगे थे ...
कुछ मोहब्बत सी करने लगे थे ...।।

इश्क का ख़ुमार कुछ इस तरह चढ़ गया था ...
हर अपने बेगाने और सब बेगाने अपने लगने लगे थे ...
ना दिन की खबर , ना रातों का पता था ...
हर ख्व़ाब तेरे बिना तब अधूरे से लगने लगे थे ...।।

कुछ ऐसा था वो एहसास ...
जो न कभी हम बयान कर सकते थे ...
कुछ ऐसा था वो पल ...
जो ना फिर कभी जी सकते थे ...।।

मेरे एहसास को न तुम कभी समझ पाये ...
लफ्ज़-ऐ-जुबान  कैसे कहते , 
तुम तो मेरी आँखें भी पढ़ ना पाये ...
इजहार-ऐ-मोहब्बत क्या करते , 
तुम तो हमसे अलविदा तक कह ना पाये ...।।

Saturday, April 6, 2013

..क्या गलत है और क्या सही ...।।।


इक उलझन सी है .. जो दिल में है बस गयी ...
के क्या गलत है और क्या सही ...

मेरा कहना गलत या उनका ना सुनना सही ...
उनका ना कहना गलत या मेरा सुन लेना सही ...

मेरा इकरार गलत या उनकी इनकार सही ...
उनकी तकरार गलत या मेरा इज़हार सही ...

मेरा ऐतबार गलत या उनका ऐतराज़ सही ...
उनका छिपाना गलत या मेरा जताना सही ...

मेरा तड़पना गलत या उनका सह लेना सही ...
उनका ना चाहना गलत या मेरा मान लेना सही ...

मेरा समझना गलत या उनका समझाना सही ...
उनका अनजान बने रहना गलत ..
या मेरा ही अनजान बन जाना सही ...

अब ना कोई कोशिश है मेरी .. इस उलझन को सुलझाने की ...
बस इतना काफी है मुझे .. उनका जान लेना ही ...
के मेरा प्यार गलत ..
या उनका प्यार सही ...