Friday, June 21, 2013

महसूस किया है ...




बहती इन हवाओं  में ...
मैंने तेरे ख़ुमार को महसूस किया है ...

जब तुम ना हो मेरे साथ उस पल में अपने  ..
मैंने तेरी मौजुदगी को महसूस किया है ...

हर एक सास के साथ अपनी ..
मैंने तेरी खुशबु को महसूस किया है ...

धड़कन की आवाज़ में अपनी ..
मैंने तेरे नाम को महसूस किया है ...

दिल की बातो में अपनी ..
मैंने तेरे वजूद को महसूस किया है ...

हसीन ख्वाबों में अपने ..
मैंने तेरी ही शिरकत को महसूस किया है ...

हर जज्बातों में अपने ..
मैंने तेरे इश्क को महसूस किया है ...

Thursday, May 9, 2013

दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??


दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??

जो तुझसे हमेशा दूर था .. उसे अपना क्यूँ समझता है ..??

क्यूँ खुद ही ज़ख्म बना के .. उसे खुद ही कुरेदता है ..??
दिल तू बेवजह ही .. क्यूँ दुखता है ..??

जो तेरे लिये कभी था ही नहीं .. उसे खोने से क्यूँ डरता है ..??
क्यूँ सुलझी सी इस बात को .. सोच-सोच कर और उलझाता है ..??
दिल तू फिर इस तरह .. क्यूँ दुखता है ..??

जो बस ख्वाब थे तेरे .. उसे क्यूँ हकीक़त मान लेता है ..??
क्यूँ ख्वाबो की हसीं दुनिया छोड़ .. दर्द भरी ज़िन्दगी जीता है ..??
दिल तू जाने .. क्यूँ दुखता है ..??

जो जिंदगी का बस एक किस्सा है .. उसे क्यूँ जिंदगी का हिस्सा कहता है ..??
क्यूँ उन किस्सों को याद कर .. ज़िन्दगी में बस गम को सहता है ..??
दिल तू नादान तो नहीं .. जो यूँ दुखता है ..??

जो राह तेरी है ही नहीं .. उस पर की मंजिल को क्यूँ सोचता है ..??
क्यूँ नहीं तू किसी मोड़ पर मुड़के .. अपनी राह ही बदल देता है ..??
दिल तू ऐसे ही .. क्यूँ दुखता है ..??

जो कहता नहीं तुझे अपना .. क्यूँ उस पर ऐतबार कर बैठता है ..??
क्यूँ इस पत्थर दिल दुनिया में तू .. प्यार का ये सौदा ही करता है ..??
दिल तू सब जान कर  भी .. आखिर क्यूँ दुखता है ..??

दिल तू .. क्यूँ दुखता है ..??

Thursday, April 11, 2013



कुछ अपने से लगने लगे थे ...


कुछ अपने से लगने लगे थे ...
कुछ तुम से जुड़ने लगे थे ...
कुछ करीब से होने लगे थे ...
कुछ मोहब्बत सी करने लगे थे ...।।

इश्क का ख़ुमार कुछ इस तरह चढ़ गया था ...
हर अपने बेगाने और सब बेगाने अपने लगने लगे थे ...
ना दिन की खबर , ना रातों का पता था ...
हर ख्व़ाब तेरे बिना तब अधूरे से लगने लगे थे ...।।

कुछ ऐसा था वो एहसास ...
जो न कभी हम बयान कर सकते थे ...
कुछ ऐसा था वो पल ...
जो ना फिर कभी जी सकते थे ...।।

मेरे एहसास को न तुम कभी समझ पाये ...
लफ्ज़-ऐ-जुबान  कैसे कहते , 
तुम तो मेरी आँखें भी पढ़ ना पाये ...
इजहार-ऐ-मोहब्बत क्या करते , 
तुम तो हमसे अलविदा तक कह ना पाये ...।।

Saturday, April 6, 2013

..क्या गलत है और क्या सही ...।।।


इक उलझन सी है .. जो दिल में है बस गयी ...
के क्या गलत है और क्या सही ...

मेरा कहना गलत या उनका ना सुनना सही ...
उनका ना कहना गलत या मेरा सुन लेना सही ...

मेरा इकरार गलत या उनकी इनकार सही ...
उनकी तकरार गलत या मेरा इज़हार सही ...

मेरा ऐतबार गलत या उनका ऐतराज़ सही ...
उनका छिपाना गलत या मेरा जताना सही ...

मेरा तड़पना गलत या उनका सह लेना सही ...
उनका ना चाहना गलत या मेरा मान लेना सही ...

मेरा समझना गलत या उनका समझाना सही ...
उनका अनजान बने रहना गलत ..
या मेरा ही अनजान बन जाना सही ...

अब ना कोई कोशिश है मेरी .. इस उलझन को सुलझाने की ...
बस इतना काफी है मुझे .. उनका जान लेना ही ...
के मेरा प्यार गलत ..
या उनका प्यार सही ...

Monday, March 25, 2013


इरादा है ...!!!


कभी एक नज़र , तुझे देखना ही काफ़ी था ....
अब तो तुझसे बस... 
रूबरू हो जाने का इरादा है ...!!!

कभी साँसे लेना भर ही , ज़िन्दगी जीना था ....
अब तो  हर पल तू  हो साथ... 
ऐसी ज़िन्दगी जीने का इरादा है ...!!!

कभी वक़्त को यूँ ही , गुज़रते देखता था ...
अब तो हर वक़्त बस... 
तुझे देखते हुए गुज़ारने का इरादा है ...!!!

कभी ख़ुदा के वजूद का होना , बस महसूस किया करता था ....
अब तो तुझे ही बस... 
ख़ुदा कह लेने का इरादा है ...!!!

कभी मंज़िल जाने बिना ही , राहों पर यूँ ही चल पड़ता था ....
अब तो जिसकी मंज़िल सिर्फ तुम हो... 
उन राहों पर चलने का इरादा है ...!!!

कभी जन्नत  के एहसास को , लफ़्ज़ों में ही पढ़ा करता था ....
अब तो तुझसे इश्क करने के एहसास को ही... 
जन्नत मान लेने का इरादा है ...!!!

कभी सितारों के टूटने पर , दुआवों का कबूल होना सुना करता था ....
अब तो फिर सारी कायनात से बस... 
तुझको माँग लेने का इरादा है ...!!!