इरादा है ...!!!
कभी एक नज़र , तुझे देखना ही काफ़ी था ....
अब तो तुझसे बस...
रूबरू हो जाने का इरादा है ...!!!
कभी साँसे लेना भर ही , ज़िन्दगी जीना था ....
अब तो हर पल तू हो साथ...
ऐसी ज़िन्दगी जीने का इरादा है ...!!!
कभी वक़्त को यूँ ही , गुज़रते देखता था ...
अब तो हर वक़्त बस...
तुझे देखते हुए गुज़ारने का इरादा है ...!!!
कभी ख़ुदा के वजूद का होना , बस महसूस किया करता था ....
अब तो तुझे ही बस...
ख़ुदा कह लेने का इरादा है ...!!!
कभी मंज़िल जाने बिना ही , राहों पर यूँ ही चल पड़ता था ....
अब तो जिसकी मंज़िल सिर्फ तुम हो...
उन राहों पर चलने का इरादा है ...!!!
कभी जन्नत के एहसास को , लफ़्ज़ों में ही पढ़ा करता था ....
अब तो तुझसे इश्क करने के एहसास को ही...
जन्नत मान लेने का इरादा है ...!!!
कभी सितारों के टूटने पर , दुआवों का कबूल होना सुना करता था ....
अब तो फिर सारी कायनात से बस...
तुझको माँग लेने का इरादा है ...!!!
No comments:
Post a Comment